Friday, 12 June 2020

जगदीशपुर की गरीबों के आवाज "श्रीभगवान सिंह कुशवाहा"

"बिहार" एक ऐसा शब्द है जिसको सुनते ही अन्य राज्यों के लोगों के मन में बस यहीं ख्याल आता है- वहीं अनपढ़, गले में गमछा लिए, ठेले पर सब्जी बेचने वाला, गार्ड की नौकरी करने वाला, फैक्ट्रियों में मजदूरी करने वाला या गुंडा गरदी करने वाला एक ''बिहारी''। और हो भी क्यों ना आखिर सब जगह हमें ऐसे ही तो दिखाया गया है, चाहे वो कोई सिनेमा हो या दूसरे राज्यों के नेता।पर शायद वो लोग ये नहीं देखते की हम अपनी मेहनत की बदौलत देश क्या विदेशों में भी अपना परचम लहरा रहे हैं। कोई भी ऐसा सरकारी दफ्तर नहीं होगा, जहां हम ना हो यहीं नहीं सबसे ज्यादा अगर आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को कोई राज्य देश को देता है तो वो बिहार ही है। और कहते हैं कि दिल्ली की गद्दी का रास्ता बिहार और उत्तर प्रदेश से हो के ही गुजरता है। फिर भी हमें इस हीनभावना से देखा जाता है आखिर क्यों?
हम कतई ऐसे नहीं थे और ना हैं, जैसा हमें दिखाया जाता है। कुछ मजबुर हम थे तो कुछ हमारे राज्य नेताओं ने कर दिया। आप खुद सोचिए बिहार एक ऐसा राज्य है जहां 8 बार राष्ट्रपति शासन लगा और इसमें से अधिकतर बार तो सता पाने के लोभ में नेताओ कि वजह से लगा। साल 2000 में झारखंड के अलग होने के बाद बिहार में संसाधनों की बहुत कमी हो गई। बाकी बिहार से झारखंड के अलग होने से पहले ही सरकार की उदासीनता के कारण कारखाने धीरे-धीरे बंद होते गए।
मैं भी एक बिहारी हूं और बिहार के भोजपुर जिले के जगदीशपुर विधानसभा क्षेत्र से आता हूं। नेता तो बहुत हुए जगदीशपुर में मगर एक ऐसा नेता जो एक साधारण परिवार से निकाल कर लोगों की आवाज बन गया और गरीबों का मसीहा कहलाने लगा। मैं उस नेता से बहुत प्रभवित हुआ। मैं बात कर रहा हूं श्रीभगवान सिंह कुशवाहा कि एक ऐसा नेता जिन्होंने निर्धन परिवार से निकलकर ग्रामीण विकास मंत्रालय तक संभाला।जितनी जानकारी मुझे उनके जीवन के बारे में है मै आपलोगों के साथ साझा करना चाहता हूं। जगदीशपुर की भूमि से नेता तो बहुत हुए पर भोजपुर जिले के हरिगांव पंचायत के अन्तर्गत दुल्हिनगंज में 14-08-1964 को श्रीभगवान सिंह कुशवाहा का जन्म हुआ।

निर्धन परिवार में जन्में श्रीभगवान सिंह कुशवाहा के पिता की मत्यु साल 1972 में हो गई। पिता की मत्यु के बाद उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत ही कमजोर हो गई। शायद यहीं कारण है कि वे गरीबों और कमजोर लोगों की पीड़ा भलीभांति समझते हैं। कठिन परिश्रम और लंबे संघर्ष की बदौलत उन्हें जगदीशपुर की जनता का आपार समर्थन मिला और 1990 के चुनाव में जनता ने उन्हें विधानसभा पहुंचाया। यह जीत श्रीभगवान सिंह कुशवाहा कि अकेले की नहीं थी बल्कि जीत थी उन लाखों गरीबों और असहाय लोगों की।  इस प्रकार की सेवा भावना की वजह से भगवान सिंह कुशवाहा गरीबों के मसीहा बन गए। जीतने के बाद भी उन्होंने गरीबों के लिए जीना ही अपना कर्म बना लिया और वो आज भी बखूबी अपनी जिम्मेदारी को निभाते हैं। जनता भी कदम कदम पर उनका साथ देती है। इन सब के बीच 1992 में उनका विवाह क्रांतिकारी नेता मास्टर जगदीश की पुत्री से हो गई। 1995 का चुनाव भगवान सिंह ने नहीं लड़ा पर 1995 से 2000 तक पॉलीटेक्निक बोर्ड के चेयरमैन रहे। साल 2000 में उन्होंने फिर चुनाव लडा और जनता ने उनके सेवा की कीमत उन्हें फिर से विजयी बना कर दिया। इसके बाद 2005 के चुनाव में भी विजयी हुए हालांकि 2005 के फरवरी में हुए चुनाव के बाद किसी पार्टी की सरकार ना बनने के कारण नवंबर 2005 में दोबारा चुनाव हुए और इस बार भी जनता का अपार समर्थन मिला और एक बार फिर श्रीभगवान सिंह कुशवाहा गरीबों की आवाज बनकर विधानसभा पहुंचे। लगातार चौथी बार विधानसभा पहुंचने के बाद उन्हें नीतीश कुमार की सरकार में ग्रामीण विभाग मंत्रालय संभालने की जिम्मेदारी सौंपी गई। ग्रामीण विकास विभाग की जिम्मेदारी इन्होंने पूरे बिहार में बहुत ही प्रभावीढंग से निभाया।
जगदीशपुर में इनके कार्यकाल के समय को चाहे वो 1990 से 1995 का हो या 2000 से 2010 का हो, जगदीशपुर का स्वर्णिम समय रहा क्यूंकि अगर बाबू कुंवर सिंह की जन्म भुमि पर विकाश की धारा बहाने का काम अगर किसी ने किया तो वो श्रीभगवान सिंह कुशवाहा ही हैं चाहे वीर कुंवर सिंह सिंह के हाता का सौदर्यकरण का काम हो, अस्पताल बनवाने का काम हो, स्कूल बनवाने का काम हो, पावरग्रिड लगवाने का काम हो, सड़क, नाले, गली या पुल बनवाने का काम हो। उनके द्वारा शुरू किए गए कार्य अभी तक हो रहे हैं। जो विकाश का कार्य इन्होंने अपने कार्यकाल में किए वो इन 10 सालों में ना तो हुए और ना बिना इनके कोई करवा सकता है। 2010 के चुनाव में इनके बढ़ते हुए कदम को रोकने के लिए साजिश के तहत इन्हे हरवाया गया। लेकिन श्रीभगवान सिंह कुशवाहा हार मानने वाले कहा थे उन्होंने गरीबों की सेवा जारी रखी और मुझे पूर्णविश्वास है कि आगे भी जारी रखेंगे।

श्रीभगवान सिंह कुशवाहा का कहना ही यही है कि सामाजिक बराबरी ही हमारे देश को प्रगतिशील बनाएगी। श्रीभगवान सिंह कुशवाहा अपने इसी व्यक्तित्वा के लिए जाने जाते हैं। गरीबों की सेवा ही उनका धर्म है।

 स्वाभिमान बेचकर राजनीति करना, आत्महत्या के समान है।                             
                                                                                      - श्री भगवान सिंह कुशवाहा